1977 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के मार्गदर्शन में कांग्रेस विरोधी शक्तियों को एकजुट कर जनता पार्टी का गठन हुआ। यह केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि आपातकाल, तानाशाही प्रवृत्तियों, भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन के विरुद्ध देशव्यापी जनआंदोलन का परिणाम था। जनता पार्टी की सरकार बनने पर प्रख्यात गांधीवादी विचारक मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने तथा चंद्रशेखर जी अध्यक्ष बने उनके नेतृत्व में लोकतंत्र की पुनर्स्थापना, नागरिक अधिकारों की रक्षा और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया गया।

उस समय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में चौधरी चरण सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी, जगजीवन राम, लालकृष्ण आडवाणी, राज नारायण, जॉर्ज फर्नांडिस तथा मधु लिमये जैसे अनेक नेता शामिल थे। इन नेताओं ने लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, किसान हित, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय एकता के लिए संघर्ष किया। जनता पार्टी ने भारतीय राजनीति में वैकल्पिक राजनीति की एक नई धारा प्रस्तुत की, जिसने सत्ता को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने का संदेश दिया।

किन्तु समय के साथ सत्ता संघर्ष, वैचारिक मतभेद और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के कारण जनता पार्टी कमजोर होती चली गई। लोकतांत्रिक मूल्यों और संपूर्ण क्रांति के आदर्शों को जिस प्रकार लागू किया जाना चाहिए था, वह पूर्ण रूप से संभव नहीं हो सका। आज भी देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ते दबाव को देखते हुए लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचार अत्यंत प्रासंगिक प्रतीत होते हैं।

इन्हीं आदर्शों, गांधीवादी मूल्यों और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सपनों को साकार करने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय लोकतांत्रिक जनता पार्टी के गठन का उद्देश्य एक स्वच्छ, पारदर्शी, जनोन्मुखी और लोकतांत्रिक राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत करना है। यह दल लोकतंत्र की रक्षा, सामाजिक समरसता, किसानों, युवाओं, मजदूरों और वंचित वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए जनसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लेता है।